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World Milk Day 2019
World Milk Day “Drink Milk: Today & Everyday”

World Milk Day “Drink Milk: Today & Everyday”

On June 1, World Milk Day is celebrated all over the world to mark the contributions of the dairy sector to economic development, farmers, and also spread awareness about the consumption of Milk and benefits of its nutrition. The day brings our attention to recognise the importance of this global food and how it is such a vital part of our diet and has been a part of our nutrition since time immemorial. Rich in nutrients, milk in its various forms has a long, long history…

  • The “Agricultural Revolution” that occured around 10000 BC, resulted in changing societies from nomadic tribes to those who settled in communities and the use of by-products such as milk came with domestication of animals.
  • In ancient Egypt, milk and other dairy products were reserved for royalty, priests and the very wealthy.
  • By the 5th century AD, cows and sheep in Europe were prized for their milk.
  • By the 14th century, cow’s milk became more popular than sheep’s milk.
  • European dairy cows were brought to North America in the early 1600s.
  • Louis Pasteur, a French microbiologist, conducted the first pasteurization tests in 1862. Pasteur is credited with revolutionizing the safety of milk and, in turn, the ability to store and distribute milk well beyond the farm. Commercial pasteurization machines were introduced in 1895.
  • In 1884, the first milk bottle was invented in New York state.
  • In the 1930s, milk cans were replaced with large on-farm storage tanks, and plastic coated paper milk cartons were invented, which allowed for wider distribution of fresh milk.
A natural product for all occasions with multi nutrition; the list below explains how and what.

Calcium: Aids in the formation and maintenance of strong bones and healthy teeth.
Vitamin A: Aids bone and tooth development. Also aids in the maintenance of night vision and healthy skin.
Vitamin B12: Aids in red blood cell formation.
Vitamin B6: Factor in the conversion of food into energy and tissue formation, including bones.
Protein: Helps build and repair body tissues, including muscles and bones, and plays a role in the creation of antibodies which fight infection.
Magnesium: Factor in bone and teeth health, conversion of food into energy and tissue formation.
Phosphorus: Factor in the formation and maintenance of strong bones and healthy teeth. Potassium: Aids in the correct functioning of nerves and muscles.
Zinc: Factor in tissue formation, including bones, and conversion of food into energy.
Selenium: Factor in the correct functioning of the immune system, due to its antioxidant effect.
Riboflavin: Factor in the conversion of food into energy and tissue formation.
Niacin: Aids in normal growth, and is a factor in the conversion of food into energy and tissue formation, including bones.
Thiamine: Releases energy from carbohydrate and aids normal growth.
Pantothenic acid: Factor in the conversion of food into energy and tissue formation, including bones.
Vitamin D: Enhances calcium and phosphorus absorption, on which strong bones and teeth depend.

World Milk Day “Drink Milk: Today & Everyday”

India: A revolution that designed a new and healthy India

India’s White Revolution, which has quietly swept the country during the past few decades, deserves attention that holds the promise of raising the nutritional status. The main architect of this successful project was Dr. Verghese Kurien, also called the father of the White Revolution. He played a great role in the transformation of India from a milk deficient nation into the world’s largest milk producers. Milk has become India’s most important farm commodity and the achievements have been realised against great odds.

A global food for the global economy – Connecting humanity

World milk production is heading for an increase in 2019 and is predicted to expand by 1.9 per cent to 859 million tonnes. It is a well-known fact that the dairy industry actively contributes to the economies of a number of communities, regions and countries. Dairy exports by India, which more than doubled in 2018, are anticipated to make further inroads this year and this dynamic global industry is forecast to continue in the long-term.

A food without grains that deliver multiple gains: sustainability, economic development, livelihoods and nutrition

While people naturally know about dairy’s nourishing nutrition, the dairy sector brings society, sustainability and world nutrition together. This sector contributes more than just tasty goodness to the world’s population. Nearly one billion people globally earn their livelihood through the dairy sector. It sustains and revitalizes rural communities in all corners of the world. Dairying has an active role in alleviating poverty and provide employment, not only to people who work on dairy farms or in dairy plants, but also to the whole sector, from upstream to downstream.

Animals that give milk: It has to be

It’s good that every morning we serve our children with a glass of milk, at that moment we only care about our needs. But for that the cows need not to be commercialize and forced exploitation upon. They exist in our ecosystem and their lives matter. When humans drink cow’s milk they imbibe the responsibility of its calves as well. So let’s choose what is right.

World No Tobacco Day 2019
World No Tobacco Day 2019 – we must become designer of our life and not our Death

World No Tobacco Day 2019

World No Tobacco Day: रिपोर्ट्स के मुताबिक हर साल करीब 70 लाख लोग तंबाकू के सेवन की वजह से मर जाते हैं।

स्मोकिंग कोई बीमारी नहीं है, जिसके लिए दवाई की जरुरत पड़े। स्मोकिंग छोड़ने के लिए मजबूत इरादे होने चाहिए। एक रिपोर्ट के मुताबिक 70 लाख लोग हर साल पूरे वर्ल्ड में तम्बाकू के कारण मर जाते हैं। अपने आपको सेहतमंद रखने के लिए जरुरी है की आज के दिन (वर्ल्ड नो तंबाकू डे) आप तंबाकू का सेवन छोड़ने की कोशिश कर सकते हैं। हम आपको कुछ ऐसे तरीके बता रहे हैं, जिन्हें अपनाकर आप आसानी से तंबाकू का सेवन छोड़ सकते हैं।

ज्यादा से ज्यादा लिक्विड लें- तंबाकू का सेवन छोड़ने से तीन दिन पहले तक खूब पानी और जूस का सेवन करें, जिससे शरीर में मौजूद ज्यातर निकोटीन बाहर निकल जाए। ग्रीन टी काफी लाभदायक है, ब्लैक टी और कॉफी को कुछ दिनों के लिए अवॉयड करें।

खाने के बाद की आदतों में बदलाव- खाने के बाद कुछ लोगों को सिगरेट पीने या तंबाकू चबाने की आदत होती है, उन्हें ये लगता है कि इससे खाना पचने में आसानी होती है। उसकी जगह कोई फ्रूट, चॉकलेट या कोई च्युइंगम खा सकते हैं।

अपना ध्यान बटाएं- अगर स्मोकिंग करने की इच्छा होती है इससे पहले आप उस इच्छा को बढ़ने दे अपना ध्यान कहीं और लगाएं। टीवी देखें, बर्तन धो लें, शावर लें या किसी फ्रेंड से बात कर लें जब तक स्मोकिंग का ख्याल नहीं चला जाता।

खुद को इनाम दें- इस तरह खुद पर कंट्रोल करने के लिए अपने को इनाम दें, जिससे इसी तरह करते रहने के लिए प्रेरणा मिलेगी।

ब्रश कर लें- जब भी स्मोकिंग करने की इच्छा तेज हो तो ब्रश करना अच्छा रहता है, इससे स्मोकिंग के लिए हो रही क्रेविंग खत्म हो जाती है। पुदीने की पत्तियां चबा लेना भी अच्छा उपाय है।

गहरी सांस लें- रोजाना गहरी सांस लेने की आदत डालें इससे अनवांटेड क्रेविंग्स नहीं होंगी।

जिनसेंग का प्रयोग करें- अपने नाश्ते में जिनसेंग पाउडर का इस्तेमाल करें। यह डोपामाइन को कम करने में मदद करता है। डोपामाइन निकोटीन में सबसे ज्यादा पाया जाता है।

रबर का धागा हाथ में पहने- जब भी स्मोकिंग के लिए क्रेविंग हो तो उस धागे को खींच दें इससे आपका ध्यान बंट जायेगा और हमेशा आपको याद दिलाएगा की आप स्मोकिंग छोड़ रहे हैं।

वर्क आउट करें- जब भी स्मोकिंग करने का मन हो तो जल्दी से 5-10 पुश-अप्स कर लें। इससे आपका दिमाग और बॉडी दोनों का ध्यान स्मोकिंग से हट जाएगा।

मेडिटेशन- दिन में 10-15 मिनट मेडिटेशन करने से आप आपकी इच्छाओं पर काबू पाना सीख सकते हैं जिससे आपको स्मोकिंग छोड़ने में आसानी होगी डैड थिंक लैब्स आज इस महत्वपूर्ण दिन को जागरूकता की नयी इबारत लिखते हुए पूरे मानव प्रजाति से इसमें शामिल होकर अपनी भागीदरी सुनिश्चित करने का आह्वाहन करती है।

“What we can or cannot do, what we consider possible or impossible, is rarely a function of our true capability. It is more likely a function of our beliefs about who we are.”
World No Tobacco Day
IPL( इंडियन प्रीमियर लीग) भारतीय अर्थव्यवस्था का नया डिज़ाइन परिचालक “

IPL 2019 Highlights: जानिए कैसे बना रहा है डिज़ाइन “IPL” को और भी महत्वपूर्ण | IPL (Indian Premiere League) भारतीय अर्थव्यवस्था का नया डिज़ाइन परिचालक "

भारत हमेशा से ही एक विकासोन्मुखी देश रहा है, दौर चाहे किसी चीज का हो हमेशा ही देश ने अपना परिचय एक बेहतरीन और जिज्ञासु  बालक की तरह दिया है।

देश की अर्थव्यवस्था पिछले कुछ सालों से बहुत नए आयाम लिख रहा है, और इसका सबसे बड़ा उदाहरण क्रिकेट है, जिसको सीधा जानने के लिए फटाफट क्रिकेट यानि IPL Highlights को देख कर समझा जा सकता है । कहा जाता है की भारत में दो चीजों का दौर हमेशा ही चलेगा एक शादियों का और दूसरा क्रिकेट का। आज क्रिकेट की लोकप्रियता का अंदाज़ा इससे लगाया जा सकता है की ये हर उम्र के लोगो का एक पूरे दिन का खास मनोरंजन बनता गया है।

एक खेल जो पूरी दुनिया एक साथ खेलती है |

ये सिर्फ कुछ टीमों का खेल नहीं वास्तव में इसमें पूरा भारत नहीं बल्कि पूरी दुनिया खेल रही होती है|  इसमें इनके जोश और उत्साह की कोई सीमा ही नहीं होती। इसके एक नए स्वरूप को हम इस तरीके से समझ सकते हैं की , ’IPL’ ने  भारत की अर्थव्यवस्था एक नया अध्याय ही लिख दिया है, और आज ‘IPL’ देश के सबसे बड़े बिज़नेस का केंद्र बनता जा रहा है  IPL दुनिया में सबसे ज्यादा -भाग लिया जाने वाला क्रिकेट लीग है और सभी खेल लीग के बीच छठे स्थान पर है।  


IPL 2019 Highlights के अनुसार क्रिकेट का यह प्रारूप, एक डिज़ाइन परिचालक के रूप में पूर्णतः विकसित होता जा रहा है |

क्या आपने मंदिरों, समाज द्वारा आयोजित त्योहारों और राजाओं द्वारा आयोजित युगल और खेल के बारे में सुना है? यह सभी समाज के अर्थव्यवस्था को विकसित करने के लिए प्रयासरत हैं। स्वस्थ वातावरण में प्रतिस्पर्धा करने के लिए एकजुट होने वाले लोग मंदिर के अधिकारियों के लिए एक महान राजस्व उत्पादक हैं, और इसके अलावा वे घटना के आसपास के नागरिकों के बीच अच्छी इच्छा और सद्भाव का प्रचार करते हैं। ओलंपिक की होस्टिंग जीडीपी को बहुत उत्प्रेरित करता है क्योंकि यह खर्च सरकार और जनता दोनों के हित में संलग्न हैं।

खेल जगत की एक ऐसी ‘डिज़ाइन स्ट्रेटेजी’ जिसका असर अर्थव्यवस्था में वैश्विक स्तर पर है |

IPL Highlights Season 2015 के डाटा पर ध्यान देने पर समझ में आयेगा की कैसे आईपीएल ने भारत के जी डी पी और अर्थव्यवस्था में 11.5 लाख ₹ (अमेरिका $ 182 मिलियन) का योगदान दिया है और अपने आप में भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जी डी पी) को जोड़ने वाले बहुविध व्यवसायों में कारोबार करता है, अन्य संबद्ध क्षेत्रों जैसे यात्रा, भोजन, दूरसंचार आदि में एक मंथन का विषय है। खिलाड़ी और ईवेंट आयोजक एकमात्र ऐसे लोग नहीं हैं जिन्हें आई पी एल का सीधा लाभ मिलता है। कई अन्य व्यवसाय और सेवाएं हैं जो आई पी एल के कारण बिक्री में वृद्धि देखते हैं।

इस महोत्सव में देश दुनिया की बड़ी से बड़ी कम्पनियाँ अपने ब्रांड को प्रोमोट करना चाहती है |

IPL एक ऐसा मंच है जहाँ एक महीने तक लगभग हर घंटे हम IPL के खबरों से जुडे होते हैं, और खेल के करीब चार घन्टे के अंतराल में खुद के ब्रांड को प्रमोट करने के अनगिनत अवसर होते हैं | तो सोचिये ऐसे अवसर को कौन भला छोड़ना चाहेगा | ग़ौरतलब यह है की एक एक सेकंड की कीमत लाखों में होती है जिसपर खर्च करने के लिए हर कोई उतना ही दम लगा रहा होता है | यह मंच एक वैश्विक मंच है जहाँ पर पूरी दुनिया एक साथ एक ही एक ही तस्वीर एवं एक ही चल-चित्र देख रही होती है | इस खेल के प्रसारण को इस तरह से डिज़ाइन किया गया है की हर बडे बिज़नेस ब्रांड को अपने ओर आकर्षित करता है, और जहाँ इस स्तर पर अर्थ व्यवस्था का संचालन हो रहा हो तो इसका जीडीपी पर एक सकारात्मक असर क्यों न हो ?

IPL  के इस खेल महोत्सव में इस साल करीब बडे एवं छोटे कंपनियों को मिलाकर लगभग 30 प्रायोजक को देखा गया | इस संख्या में हर साल बढ़ोतरी देखी गयी है| देश के सबसे मोबाइल कंपनी से लेकर पान मसाला तक की कंपनियों ने हिस्सा लिया |

IPL sponsors

ब्रांडिंग एवं प्रचार प्रसार के अलग अलग माध्यम का एक प्रोफेशनल डिजाईन एवं रचनात्मक प्रणाली का महत्व

IPL एक ऐसा महोत्सव है जो दो महीने तक पूरी दुनिया को एक ही रंग में रंग देने का भाव प्रकट करती है | यह खेल का वह त्यौहार है जहाँ हर कोई अपने ऊपर तरह तरह के रंगों में रंग कर भी एक ही एक बडे मंच का एक रंग बना रहता है | रंगों का ऐसा इस्तेमाल शायद ही एक साथ किसी फैशन शो में देखने का मिलता है | डिज़ाइन एक ऐसा मंत्र है जो हर टीम हर इंसान इसको जप रहा होता है| हर कोई एक दूसरे से ज्यादा महत्वपूर्ण दिखाना चाहता है | रंग चाहे जर्सी का हो, झंडे का हो, हर रंग अपने आप में स्पेशल होता है | हर टीम की अपनी  एक पहचान है जहाँ उनको रंगों से बहुत आसानी से पहचाना जा सकता है तथा सबको एक दूसरे से अलग करते हुए सबको एक ही मंच पर रखता है | यहाँ तक की दर्शक भी खुद को तरह तरह से सजाते हुए अपने टीम के सपोर्ट में दिख जाते हैं | क्रिकेट के इस महापर्व में रचनात्मकता को बहुत महत्ता दी जाती है एवं हर साल रचनात्मकता को एक नया आयाम भी मिलता है| यह त्यौहार टेक्सटाइल से लेकर एडवरटाइजिंग इंडस्ट्री तक को बढ़ावा देती नज़र आती है|

तेज़ रफ़्तार से बढते हुए युग में आईपीएल जैसे खेल की एक अलग पहचान है

इस खेल के नियम एवं शर्तों की रचना को देखा जाए तो आज की इस भाग दौड़ की दुनिया के लिए बेहद ही सटीक है| इसके प्रसारण के समय से लेकर खेल की समय सीमा तक को इस तरह डिज़ाइन किया गया है की हर तरह के उम्र एवं पेशा के दर्शक को अपना अभिन्न हिस्सा बना लेता है | इस पूरे खेल को लोग अलग अलग माध्यम से भी अपना कमाई का ज़रिया बना लेते हैं| इसलिए यह त्यौहार हर किसी के लिए कुछ न कुछ लेकर आता है और इसने भारत को विश्व के मानचित्र पर लोगों के बीच एक नयी पहचान दिला दी है| दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र आज दुनिया का सबसे बड़ा क्रिकेट महोत्सव हर साल मनाता है, जिसका इंतज़ार पूरे साल तक पूरी दुनिया करती है |

बुद्ध पूर्णिमा….एक संपूर्ण डिजाईन मानव को मानवता के माला में पिरोने की

आईये जाने कैसे हैं भगवान बुद्ध….. धर्मक्रांती के डिज़ाइनर - उनकी जीवनी, बौद्ध धर्म की उपयोगिता और संदेश ___ डैड थिंक लैब्स के साथ

केवल धर्म नहीं - ‘बौद्ध धर्म’ अपितु यह एक प्राकृतिक डिज़ाइन प्रक्रिया है ,जो एक जीवंत आत्मा को परमात्मा से परिचय और मिलने का मार्ग भी प्रसस्त करता है ….

बुद्ध पूर्णिमा की महत्ता ….

‘बुद्ध जयंती’ वैशाख मास की पूर्णिमा को मनाई जाती है। धीरे धीरे यह बौद्ध धर्म में आस्था रखने वालों के अलावा मानवता के लिए एक प्रमुख त्यौहार बन गया है। मान्यताओं के आधार पर  पूर्णिमा के दिन ही गौतम बुद्ध का स्वर्गारोहण समारोह भी मनाया जाता है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान बुद्ध को ‘बुद्धत्व’ की प्राप्ति हुई थी। यानी यही वह दिन था जब बुद्ध ने जन्म लिया, शरीर का त्याग किया था और मोक्ष प्राप्त किया।

आज बौद्ध धर्म को मानने वाले विश्व में 50 करोड़ से अधिक लोग दान-पुण्य और धर्म-कर्म के अनेक कार्य  के माध्यम से इस दिन को बड़ी धूमधाम से मनाते हैं। इस अवसर पर विभिन्न प्रकार के मिष्ठान, सत्तू, जलपात्र, वस्त्र, अन्न  दान करने तथा पितरों का तर्पण करने से पुण्य की प्राप्ति होने की आशा होती है |

इतिहास गवाह है; महापुरुषों की कीर्ति किसी एक युग तक सीमित नहीं रहती एवं उनका लोकहितकारी चिन्तन एवं कर्म कालजयी, सार्वभौमिक, सर्वकालिक एवं सार्वदैशिक होता है|  उनका जीवन एक प्रेरणाश्रोत बन कर युग-युगों तक समाज का मार्गदर्शन करता रहेगा। एक प्रकाशस्तंभ के स्वर्णिम प्रतीक, गौतम बुद्ध हमारे जीवन के उन मूल्यों के रचईता हैं जिनको पाने के लिए लोगों को बार बार जन्म लेना पड़ेगा

बुद्ध पूर्णिमा….मानव को मानवता रूपी माला में पिरोने की एक आध्यात्मिक एवं स्वयं संयोजित डिज़ाइन प्रक्रिया

संसार अपने आप में प्रकृति का दिया हुआ एक स्वर्ग है, बस जरुरत है तो मानव के मानवता, करुणा,  प्रेम , शांति, संवेदना और ज्ञान से ओत्प्रेत हो जाने की | प्रकृति ने इस संसार में असंख्य जीवों को बनाया और उस सर्वशक्तिमान ने उसमे चेतना डालते हुए  एक नया रूप देकर सबके सह मौजूदगी के लिए श्रृष्टि की रचनात्मक व्यवस्था को डिज़ाइन किया | समाज कल्याण के भाव से प्रेरित महात्मा बुद्ध ने संन्यासी बनकर भी अपने आप को आत्मा और परमात्मा के निरर्थक विवादों से दूर रखा।  उनके उपदेश मानव के लिए दुःख एवं पीड़ा से मुक्ति के माध्यम बनते हुए सामाजिक एवं सांसारिक समस्याओं के समाधान के प्रेरक बने| उनकी सादगी, जीवन को सुन्दर बनाने एवं माननीय मूल्यों को लोक-चित्त में संचारित करने में अपना विशिष्ट स्थान रखते हैं। यही कारण है कि उनकी बात लोगों की समझ में सहज रूप से ही आने लगी जब महात्मा बुद्ध ने मध्यममार्ग अपनाते हुए अहिंसा युक्त दस शीलों का प्रचार किया | उन्होंने पुरोहितवाद पर करारा प्रहार किया और व्यक्ति के महत्त्व को प्रतिष्ठित किया | उनका मानना था कि मनुष्य यदि अपनी तृष्णाओं पर विजय प्राप्त कर ले तो वह निर्वाण प्राप्त कर सकता है| उनकी मान्यताओं पर गौर किया जाए तो एक विशिष्ट एवं रचनात्मक डिजाईन  प्रणाली का भाव नज़र आयेगा | जिस प्रकार डिजाईन मानव के किसी भी समस्याओं को हल करके आसान बनाता है, ठीक वैसे  हीं ,बौद्ध दर्शन भी हमारे पूरे जीवन और जीवन की विसंगतियों को सरल बनाता है I अगर आज सिर्फ मानवता को  डिज़ाइन के अस्तित्व के मूल्यों के आधार पर व्यवस्थित किया जाये तो पूरे श्रृष्टि को नुकसान पहुंचा जाने वाली  बुराईयाँ दूर हो जायेंगी I
bodhi tree

चेतन और अचेतन मन के बीच की दूरी और उसका ज्ञान हो जाये तो विश्व का कल्याण हो जायेगा

गौतम बुद्ध ने बौद्ध धर्म का प्रवर्तन किया साथ ही  काफी कुशलता से बौद्ध भिक्षुओं को संगठित किया और लोकतांत्रिक रूप में उनमें एकता की भावना का विकास किया। इस धर्म का अहिंसा एवं करुणा का सिद्धांत इतने प्रभावशाली  थे , कि सम्राट अशोक ने दो वर्ष बाद इससे प्रभावित होकर बौद्ध मत को स्वीकार किया और युद्धों पर रोक लगा दी। इस प्रकार बौद्ध मत देश की सीमाएँ लाँघ कर विश्व के कोने-कोने तक अपनी ज्योति फैलाने लगा। आज भी इस धर्म की मानवतावादी, बुद्धिवादी और जनवादी परिकल्पनाओं को नकारा नहीं जा सकता और इनके माध्यम से भेद भावों से भरी व्यवस्था पर ज़ोरदार प्रहार किया जा सकता है। यही धर्म आज भी दुःखी, पीड़ित एवं अशांत मानवता को शांति प्रदान कर सकता है। ऊँच-नीच, भेदभाव, जातिवाद पर प्रहार करते हुए यह लोगों के मन में धार्मिक एकता का विकास कर रहा है। विश्व शांति एवं परस्पर भाईचारे का वातावरण निर्मित करके कला, साहित्य और संस्कृति के विकास के मार्ग को प्रशस्त करने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है।

खूबसूरत और वैश्विक समाज की डिज़ाइनिंग की परिकल्पना जहाँ सभी एक दूसरे से प्रेम और भाईचारे के बंधन से जुड़े हों I

वास्तव में देखा जाए तो राज-शासन और धर्म-शासन दोनों का ही मुख्य उद्देश्य जनता को सन्मार्ग पर ले जाना है। परन्तु राज-शासन के अधिनायक स्वयं मोहमाया ग्रस्त प्राणी होते हैं, अतः वे समाज सुधार के कार्य में पूर्णतया सफल नहीं हो पाते। भला, जो जिस चीज को अपने हृदयतल में से नहीं मिटा सकता, वह दूसरे हजारों हृदयों से उसे कैसे मिटा सकता है? राज-शासन की आधारशिला प्रेम, स्नेह एवं सद्भाव की भूमि पर नहीं रखी जाती है, वह रखी जाती है, प्रायः भय, आतंक और दमन की नींव पर। यही कारण है कि राज-शासन प्रजा में न्याय, नीति और शांति की रक्षा करता हुआ भी अधिक स्थायी व्यवस्था कायम नहीं कर सकता। जबकि धर्म-शासन परस्पर के प्रेम और सद्भाव पर कायम होता है, फलतः वह सत्य-पथ प्रदर्शन के द्वारा मूलतः समाज का हृदय परिवर्तन करता है और सब ओर से पापाचार को हटाकर स्थायी न्याय, नीति तथा शांति की स्थापना करता है।     

बुद्ध अन्ततोगत्वा इसी निर्णय पर पहुंचे कि भारत का यह दुःसाध्य रोग साधारण राजनीतिक हलचलों से दूर होने वाला नहीं है। इसके लिए तो सारा जीवन ही उत्सर्ग करना पड़ेगा, क्षुद्र परिवार का मोह छोड़ कर ‘विश्व-परिवार’ का आदर्श अपनाना होगा। राजकीय वेशभूषा से सुसज्जित होकर साधारण जनता में घुला-मिला नहीं जा सकता। वहां तक पहुंचने के लिए तो ऐच्छिक लघुत्व स्वीकार करना होगा, अर्थात् भिक्षुत्व स्वीकार करना होगा। ताकि लोगो की आकांक्षाओं को समझते हुए एक ऐसे समाज की परिकल्पना की जा सके, जहाँ समानता, दया , प्रेम और सद्भाव हो।

Golden Buddha

मानवता जो की डिज़ाइनिंग का सबसे बेहतरीन पाठ है महात्मा बुद्ध से सीखने को I

मानवता को बुद्ध की सबसे बड़ी देन है भेदभाव को समाप्त करना।  मानवता ही मानव होने का सबसे बड़ा प्रमाण है लेकिन आज भी बहुत सरे लोग अज्ञानता वश या अभिमान में अपने आप को सरलता से जटिलता की तरफ धकेल रहे हैं I यह एक विडम्बना ही है कि बुद्ध की इस धरती पर आज तक छूआछूत, भेदभाव किसी न किसी रूप में विद्यमान हैं। उस समय तो समाज छूआछूत के कारण अलग-अलग वर्गों में विभाजित था। बौद्ध धर्म ने सबको समान मान कर आपसी एकता की बात की तो बड़ी संख्या में लोग बौद्ध मत के अनुयायी बनने लगे। कुछ दशक पूर्व डाक्टर भीमराव आम्बेडकर ने भारी संख्या में अपने अनुयायियों के साथ बौद्ध मत को अंगीकार किया ताकि हिन्दू समाज में उन्हें बराबरी का स्थान प्राप्त हो सके। बौद्ध मत के समानता के सिद्धांत को व्यावहारिक रूप देना आज भी बहुत आवश्यक है। मूलतः बौद्ध मत हिन्दू धर्म के अनुरूप ही रहा और हिन्दू धर्म के भीतर ही रह कर महात्मा बुद्ध ने एक क्रांतिकारी और सुधारवादी आन्दोलन चलाया। भगवान बुद्ध ने कहा की अगर हम मानवता के इस संरचना को समझ ले और इसमें अमल कर लें तो समस्त विश्व का कल्याण हो जायेगा ।

डैड थिंक लैब्स आज इस पावन दिवस पर समस्त जीव-मात्र को ईश्वर की सबसे उत्कृष्ट संरचना मानते हुए इसे मानवता के लिए सबसे बड़ा उपहार बता रहा है साथ ही यह भी कहना चाह रहा है की यह वास्तविकता में सबसे बड़ा डिज़ाइन है ।

एक ऐसा विश्व जहाँ हर मानव अपने शरीर , मन और आत्मा से एक हो उसपर उनका नियंत्रण हो ।

जब एक सिद्धार्थ से महात्मा बुद्ध तक की यात्रा मानव मन पर विजय प्राप्त कर के पूरी की जा सकती है तो फिर हम आप भी उनके बताए नियमों और सिद्धांतों को पाकर अपने जीवन को सफल बना सकते हैं ।बुद्ध का लोगों तक जाने तक की यात्रा आसान  नहीं थी ,अपने जीवन के सारे अनुभवों को बांटने, और कठोर तप करने से पहले स्वयं को अकेला बनाया ,खुद को तपा कर जीवन का सच जाना I उन्होंने यह संदेश दिया कि अगर हमारे भीतर का संसार स्वच्छ होगा तभी हम अपने आसपास भी सफाई रख पाएंगे , बुरा ना  देखना, ना सुनना , ना बोलना यही ख़ालीपन का सन्देश सुख, शांति, समाधी का मार्ग है I अपने दीपक स्वयं बनने की बात और सबसे पहले वर्तमान में जीने की बात कही क्योंकि अगर मानव मन सुख-दुःख, हर्ष-विषाद से घीरे रहना, कल की चिंता में झुलसना, तनाव का भार  ढ़ोना होगा तो ऐसी स्थिति में भला मन कब कैसे शांत हो सकता है ? ना अतीत की स्मृति ना भविष्य की चिंता यही मूल मंत्र है I आज जरुरत है, उन्नत एवं संतुलित समाज निर्माण के लिए महात्मा के उपदेशो के जीवन में ढालने की , ऐसा करके ही समाज को संतुलित बना सकेंगे I बुद्ध को केवल उपदेशो तक ही सिमित न रखे बल्कि बुद्ध को जीवन का हिस्सा बनाये अपना आईना बनाये जिसमे देखकर हर इंसान कहे की बुद्ध ही सार्थक जीवन का सबसे बड़ा उदाहरण है I

Dream 11- अब किसान का बेटा भी बन सकेगा डिज़ाइनर

Dream 11- DAD के साथ अपने सपनो को डिज़ाइन करें|

राष्ट्रीय डिजाइन नीति निकट भविष्य में भारत को डिजाइन श्रोत सेंटर बनाने की इच्छा रखती है। इसने प्रेरणा देने, उद्द्योग चलाने और उसी के लिए क्षमता निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वांछित आकार लेने के लिए जागरूकता लाने और रास्ता बनाने में कई पहल महत्वपूर्ण साबित हुई हैं।

गुणवत्ता डिजाइन शिक्षा की दिशा में काम करना इसका एक मुख्य उद्देश्य है। और DAD- डिजाइन जागरूकता अभियान, राष्ट्रीय डिजाइन नीति, भारत सरकार द्वारा नियोजित मिशन के निष्पादन की दिशा में काम करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

शिक्षा हमेशा समाज के दो वर्गों द्वारा संचालित की गई है। एक व्यवसाय समूह से संबंधित है, जिन्होंने सिस्टम के प्रत्येक इकाई और टुकड़ों को बेचने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। और दूसरा उन लोगों का समूह है जिन्होंने शिक्षा प्रणाली के जमीनी विकास के लिए अपना जीवन समर्पित किया है।

प्रकृति खुद को संतुलित करती है और कहानी उसी के आसपास चलती है। जिस तरह से प्रकृति की प्रणाली को बनाए रखने के लिए डिज़ाइन किया गया है वह स्वयं टिकाऊ है। यह नकारात्मक और सकारात्मक के बारे में है। पूरा ब्रह्मांड इस अवधारणा के साथ काम कर रहा है फिर शिक्षा को क्यों नहीं बख्शा जाएगा?

“प्रकृति को हमारी आवश्यकताओं के लिए उपयोग किया जाना है और हमारे लालच को सहना है”

अच्छाई सबको प्रेरित करता है, और वह सबसे अच्छा होता है I और बुरा बदतर को आकर्षित करता है। हमारे आसपास से प्रेरणा लेना सकारात्मक विकास के लिए सबसे अच्छी पहल है।

सुपर 30 ……… श्री आनंद कुमार से प्रेरित है|

“आनंद कुमार”, बिहार में एक मामूली परिवार से एक गणित प्रतिभा है जो यह विश्वास करने के लिए बनाया गया था कि केवल एक राजा का बेटा ही राजा नही बन सकता है। वह यह साबित करने के लिए एक मिशन पर निकलता है कि गरीब आदमी भी दुनिया के कुछ सबसे प्रतिभाशाली दिमाग बना सकता है। वह एक प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करता है, जिसका नाम ‘सुपर 30’ है, जो 30 आईआईटी उम्मीदवारों को प्रवेश परीक्षा क्रैक करने में मदद करता है और उन्हें अत्यधिक सफल पेशेवर बनाता है जो सीधे आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था के निर्माण में भाग ले सकते हैं|


यह डिजाइन और फैशन का सुपर 30 है। यह उनके सपनों को साकार करने के लिए डिजाइन के इच्छुक लोगों का उल्लेख और मार्गदर्शन करता है। डिजाइन एक शिक्षा है जिसे एक व्यक्तिगत दृष्टिकोण और एक सही मार्गदर्शन की आवश्यकता होती है। इसलिए 30 छात्रों के तर्ज़ पर DREAM 11 की अवधारणा 11 नंबर से ली गई है जो पौराणिक रूप से भाग्यशाली और पवित्र माना जाता है। इसके अलावा नाम का युवाओं के साथ एक मजबूत संबंध है।



ऑनलाइन टेस्ट – एक महीने के लिए खुली रहेगी , पंजीकरण करते समय तारीखें प्रदान की जाएंगी।

ऑफलाइन टेस्ट

पंजीकरण के लिए – 9304516169

प्रशिक्षक- जो उम्मीदवारों को प्रशिक्षित करेंगे

जो लोग एक या दूसरे तरीके से डिजाइन उद्योग से जुड़े हैं, वे DAD में वास्तविक संसाधन व्यक्ति बन जाते हैं I

DAD ने एक इनोवेशन लैब बनाई है जहाँ छात्रों और शिक्षकों को रचनात्मक स्वतंत्रता प्रदान की जाती है। डीएडी देश का सबसे बड़ा डिजाइन समुदाय है जिसमें विभिन्न विशेषज्ञ, शोधकर्ता, निफ्टियन, एनआईडीआईएन, शिल्पकार, प्रशिक्षक हैं। यह भारत के इतिहास में पहली बार है कि छात्रों की मदद के लिए एक खुला समुदाय सामने आया है।

लगभग 25 वर्षों के अनुभव के साथ Mentors, नए युग के उद्यमी जिन्होंने शैक्षिक अनुसंधान और विकास में एक दशक से अधिक समय बिताया है, ऐसे संरक्षक जिन्होंने विषयों को अगले स्तर तक सरल बनाया है और डिजाइन संस्थानों के युवा और गतिशील छात्रों को जो सीधे सिस्टम से जुड़े हैं। यह एक समय है जब लोग एक अच्छी तरह से प्रबंधित प्रणाली के माध्यम से समाज को वापस देने के लिए तैयार हैं।

ऑनलाइन संसाधन और वैचारिक मानव पुस्तकालय हमारी प्रशिक्षण पद्धतियों के मूल हैं जिनमें शामिल हैं:-


  • खुली – प्रयोगशाला आधारित
  • डिजाइन थिंकिंग प्रोसेस
  • अभिनव क्षमताओं
  • लेखन कला
  • अवधारणा विकास
  • विषयगत प्रक्रिया
  • गणनात्मक क्षमता
  • संचार क्षमता
  • तार्किक क्षमता
  • प्रस्तुति कौशल
  • विशेषज्ञ प्रेरणा
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हम अंतरराष्ट्रीय डिजाइन शिक्षा के अद्यतन शिक्षाशास्त्र के इनपुट की प्रतीक्षा कर रहे हैं जो पहले से ही हमारे राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों को लाभ पहुँचा चुका है।


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DREAM 11 – Design your dreams with DAD


National Design Policy aspires to make India a design sourcing hub in near future. It has played a pivotal role in inspiring, driving the industry and working towards building the capacity for the same. Several initiatives have proven to be instrumental in creating awareness and making way for the vision to take desired shape.

One of it’s main objectives is to work towards quality design education. And DAD- Design Awareness Drive is all set to work towards execution of the mission planned by National Design Policy, India.

Education always have had been run by two sections of the society. One that belongs to business group who have left no stone unturned to sell each and every bits and pieces of the systems. And the other is the set of people who have dedicated their lives for grass root development of education system.

Nature balances itself and the story runs around the same. The way the system of nature has been designed to keep is self sustainable. It is about negatives and positives. The whole universe has been is dealing with the concept then why would education be spared?

“The nature is to be utilized for our needs and just to suffice our greeds”

Good inspires and leads to the best and bad attracts worse. Taking inspiration from our surroundings is the best foot forward to positive development.

Inspired by THE SUPER 30……… Mr. Anand Kumar

“Anand Kumar, a Mathematics genius from a modest family in Bihar who was made to believe that only a King’s son can become a king. He goes out on a mission to prove that even the poor man can create some of the world’s most genius minds. He starts a training program named ‘Super 30’ to help 30 IIT aspirants crack the entrance test and make them highly successful professionals who can take part directly in building a self sustaining economy”.


It is a super 30 of Design and Fashion. It mentors and guides the Design aspirants to realize their dreams. Design is an education that needs a individual approach and very one to one guidance. So it is not possible to deal with 30 students. So it was supposed to be 10. The concept of DREAM 11 has been derived from the number 11 that is mythologically known to be lucky and sacred. Moreover the name has a strong connection with youth.


“We are in search of 11 passionate Design Aspirants who are committed to Design their own career in fields of Design and Fashion. The selection process is a paper based test, followed by Psychometric Test and PI”

DREAM 11 gives priority to the aspirants who are economically not very sound. This does not mean that aspirants who are economically sound and passionate shall not be given the chance. It makes sure that no passionate aspirant is left behind. The test is open to all the candidates from across the nation. Aspirants can join any of the mode of test which shall be open for next one month.

  1. Online Test – Open for a month, dates shall be provided while registration.
  2. Offline Test


THE TRAINERS- Who will train the Aspirants

People who are connected to Design Industry in one or the other way become the real resource person at DAD

DAD has created an Innovation Lab where the students and teachers are provided the creative freedom. DAD is the nation’s biggest Design community that has 1000s of experts, researchers, NIFTians, NIDians, craftsmen, trainers. This is the first time in the history of India that an open community has come in front to help the students.

Mentors with experience of about 25 years, new age entrepreneurs who have spent more than a decade in educational research and development, mentors who have simplified the subjects to next level and young and dynamic students of design institutions who are connected directly with the system. It is a time when people are ready to give back to the society through a well managed system.

Online resources and the conceptual human library are core of our training methodologies that includes:

  • Design Thinking Process
  • Innovation Abilities
  • Writing Skills
  • Concept Development
  • Thematic Process
  • Calculative Ability
  • Communication Ability
  • Logical Ability
  • Presentation Skills
  • Expert Motivation
  • Individual Mentorships
  • Documentation
  • Computer Applications
  • Web Applications use

We are looking forward to input the updated pedagogy of international design education which has already hit the institutions of our national importance.

  • Design Research
  • Innovation Process
  • Elements of Design
  • Design Development
  • Management In Design
  • Maths in Design
  • Logical Thinking in Design
  • Self Study
  • Outdoor Classes
  • Educational Tours
  • English Speaking in daily life
  • Open Discussion Forums
  • Knowledge Management Center
क्या हम जानते है, “शिल्प गुरु” कौन है?

कुछ महीने पहले 26 जनवरी को भारत सरकार के द्वार राष्ट्रीय सम्मान समारोह हुआ था। उसमे एक नाम उभर कर आया, गोदावरी दत्ता। शायद आप, अभी भी नही समझ पाए होंगे की हम किस की बात कर रहे है। एक ऐसी महान व्यक्तित्व जिन्होंने 83 वर्षो तक अथक प्रयास कर के अपने क्षेत्रीय कला को एक नया आयाम एवं अलग पहचान दिलाया है। हमने मिथिला कला के बारे में बहुत सुना एवं पढ़ा होगा, कुछ लोगो ने इस कला को देखा भी होगा । मिथिला कला एक पारंपरिक कला है, जो एक पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है । ये मुख्यतः माँ अपनी बेटियों को एक परंपरा के रूप में सिखाती है। इसकी उत्पति बिहार के मिथिला में हुआ था, अब ये मिथिला और मधुबनी की पहचान बन चुकी है. आज कल ये मधुबनी पेंटिंग के नाम से चलन में है ।

गोदावरी जी ने अपने अद्भुत कला के ज्ञान से आज मिथिला कला को पुरे विश्व में एक अलग सम्मान दिलाया है, जिससे पूरे भारत-वर्ष का सम्मान बढ़ा है। उनको ये कला उनकी माँ सुभद्रा देवी से विरासत में मिली। कला के प्रति लगाव और जुनून को देखते हुए 1960 में राष्ट्रीय सम्मान से सम्मानित किया गया तथा 2006 में उनके कला प्रतिभा को देखते हुए उनको “शिल्प गुरु” के नाम से संबोधित किया गया था। कला उत्थान के क्षेत्र में उनके योगदान लिए उन्हें पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया गया।

एक वाक्य है “Have patience and faith and keep doing the right thing...” ये वाक्य गोदावरी जी के चरित्र को बताता है। ये सफर उनके लिए लिए आसान नही था, एक मध्यम वर्ग में जन्मी लेकिन अपने माँ से मिली ज्ञान और अपने दृढ संकल्प से जीवन के सारे कठिन पड़ाव पार करते हुए आज "शिल्प गुरु" के नाम से जानी जाती है. DAD गोदावरी जी की ज्ञान रूपी तपस्या, इच्छा शक्ति एवं दृढ़ निश्चय के लिए उन्हे नमन करती है। "जय हिन्द"

DADs Design Stories

“If necessity the mother of Invention; then crisis is the father of Creativity”

Have you ever come across the word called ‘JUGAAD’ ? If not look for it and you will be surprised that you have already gone through several inventions in your daily life.

Here at DAD’s DESIGN STORY we document your JUGAAD, your creative efforts and showcase them to the world. So, if you are a junior thinker in school, an art practitioner, an idea generator, innovator, design aspirant, a design student, an entrepreneur with design background, a researcher at any level of any age or an explorer, we are here to communicate your struggle, experience and success to people.


Picture by: Ranjit Prasad, Independent Photographer and Traveler


We focus on the stories in making…..

History is made and it is not destined for sure and this can be understood by reaching out to the stories of curators. When life curates itself into a history we get several reactions; some watch and some act.  DAD is dedicated to act on the stories and bring them in front of the world.

The initiative itself is a page being curated into history.  Till date the potential of design has been mostly untapped. We as a design community are dedicated  to create a platform which works on a capacity building process and create a design led global economy. Our co-existence is to asses, showcase and set forth the awesome spark of awe inspiring innovation, creativity in every individual and co-create a change making scenario.

Our consistency for innovation, thinking  and their resounding global resonance is only maintained by the routes to bring the designers, researchers and thinkers community to a single platform for a free-flowing exchange of ideas and visions. Our PAN India presence brings the best and the brightest mind regardless of age, expertise, social strata to the golden screen they deserve.

We have envisioned the initiative as ‘DAD- Design Awareness Drive” under the aegis of “United Countryouths Foundation, Republic of India”. The DAD has initiated ‘THINK LABS’ based on the objectives of National design Policy, Govt. of India to promote Design at every level.  DAD Think Labs are envisioned to be constituted in schools, institutions and community centers across the nation with mission to introduce the ‘Basics of Design’ to foster innovation.

Our mission has been to tell design stories that matter, stories with heart, with drive, and that wouldn’t be possible without the passion of our team – they are the heart and soul of DAD Design Story. The drive to write, build, design, shoot, edit and publish these stories comes by getting inspired by you.

We hereby invite you to join the league and get your work published online in front of the world. We believe in the mantra of “You work We document”

Here are simple questions to be answered to develop the story:

  1. What exactly you are doing?
  2. What do you think is the common connection if you are doing several things at a time?
  3. What brought you such a decision, of what you are doing?
  4. What stage do you think you have reached that you planned?
  5. Can you discuss your background story in few lines?
  6. What change you are driving towards?
  7. Your achievements till date?
  8. Your teammates and supports till date?
  9. Whom do you owe your success to?
  10. What do you have to say to new generation and others?
  11. What is your attitude towards discipline?

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